महामारी में मानवता:: अपनों ने जब संक्रमितों के अंतिम संस्कार से मुंह मोड़ा तो श्याम ने कदम बढ़ाए, अब तक कर चुके हैं 100 की अंत्येष्टि। पढ़िए खबर

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  • पहली लहर में 44 व दूसरी में अब तक 56 से ज्यादा संक्रमितों व कोविड संदिग्धों का अंतिम संस्कार किया

चूरू टाइम्स,सुजानगढ़। सुजानगढ़ की टीम हारे का सहारा के संयोजक श्यामसुंदर स्वर्णकार ने कोरोना काल में 100 से ज्यादा कोरोना संक्रमित व कोरोना संदिग्धों के अंतिम संस्कार कर चुके। 100 अंत्येष्टि करने के बाद स्वर्णकार ने पीड़ा के साथ यही कहा कि मैं इसे खुशी का रिकॉर्ड नहीं मानता, बल्कि इंसानियत का धर्म निभाने के बीच न चाहते हुए भी मजबूरी का शतक मानता हंू। कोरोना की पहली लहर में 44 और दूसरी लहर के सिर्फ एक महीने के अंतराल में 56 से ज्यादा कोरोना संक्रमितों व कोराना संदिग्धों की अंत्येष्टि कर चुका हूं। परिस्थिति ही ऐसी थी।

पहली लहर में जब कोविड से किसी व्यक्ति की मौत हुई तो रिश्तेदार तो दूर परिवार के सगे भी नजदीक नहीं आए। अंतिम संस्कार तो बाद की बात थी, शव को हाथ तक नहीं लगाया। ऐसे हालात देखकर रहा नहीं गया। फिर खुद को सुरक्षित रखते हुए कोविड गाइडलाइन से अंतिम संस्कार करने का कड़ा फैसला लिया। मजबूरी का ये सिलसिला अब तक जारी है। भगवान से यही प्रार्थना है कि मजबूरी का ये शतक यहीं रुक जाए।

शव की पैकिंग से लेकर धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार के सारे काम संपन्न करता हूं : श्यामसुंदर
स्वर्णकार बताते हैं कि पहले तो मृतक के परिजन पास नहीं आते थे। मुझे देखकर व समझाने के बाद अब कुछ लोग आगे आने लगे हैं, लेकिन फिर भी डरते हैं। परिजनों के साथ अंतिम संस्कार का सारा काम संपन्न करवाता हूं। शव पैकिंग से लेकर अंतिम संस्कार होने के बाद पीपीई किट जलाकर सेनेटाइज होकर निकलने तक का काम खुद करता हूं।

परिजनों ने अंत्येष्टि के बाद मेहनताना देने की भी पेशकश की, पर ईमान नहीं डगमगाया। पिछले एक महीने में तो 24 घंटे में पांच से छह तक अंतिम संस्कार करने पड़े हैं। सुजला क्षेत्र के गांव-कस्बों में भी अंत्येष्टि करवाने जाना पड़ रहा है। टीम साथी अरविंद्र विश्वेन्द्रा भी सहयोग कर रहे हैं।

  • स्वर्णकार ने विनती करते हुए कहा कि सभी घर पर रहें, सुरक्षित रहें। लापरवाही न करें, मास्क, सेनेटाइज काम में लें। मुझे भी कई बार घर से भी दूर रहना पड़ता है, ताकि मेरी वजह से परिजन संक्रमित न हो।

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