मास्टर भंवरलाल:कैबिनेट मंत्री भंवरलाल को बेटे ने दी मुखाग्नि, चुरू के सुजानगढ़ में हुआ अंतिम संस्कार पंचतत्व में विलीन

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चूरू टाइम्स न्यूज,सुजानगढ़।

कैबिनेट मंत्री भंवरलाल को बेटे ने दी मुखाग्नि, चुरू के सुजानगढ़ में हुआ अंतिम संस्कार|चूरू,Churu - Dainik Bhaskar

मास्टर भंवरलाल की पार्थिव देह को बेटे ने मुखाग्नि दी।

  • सोमवार को 72 साल की उम्र में भंवरलाल मेघवाल ने गुडगांव के मेदांता में अंतिम सांस ली थी
  • राजस्थान में एक दिन का राजकीय शोक घोषित, अपने विधायक की मौत पर सुजानगढ़ बंद रहा

राजस्थान में गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल पंचतत्व में विलीन हो गए। बेटे मनोज ने उन्हें मुखाग्नि दी। गृहनगर चूरू के सुजानगढ़ में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले उनकी पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास पर रखी गई। जहां गहलोत सरकार में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, रघु शर्मा, गोविंद सिंह डोटासरा समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने पहुंच अंतिम नमन किया। इसके अलावा, भाजपा उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, युनुस खान समेत विपक्ष के कई नेता भी मास्टर भंवरलाल के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

मास्टर भंवरलाल के निवास से श्मशान तक उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों की संख्या में उनके समर्थक शामिल हुए। शहर की गली-चौराहों जहां से पार्थिव देह निकली लोगों ने पुष्प वर्षा की। मंत्री के निधन पर सुजानगढ़ बंद रहा। प्रदेश में एक दिन का राजकीय अवकाश घोषित किया गया है।

अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने पुष्प वर्षा करके अपने नेता को नमन किया। - Dainik Bhaskar

अंतिम यात्रा के दौरान लोगों ने पुष्प वर्षा करके अपने नेता को नमन किया।

72 साल के मेघवाल का सोमवार को गुड़गांव के मेदांता में निधन हो गया था। उनकी कई महीनों से तबीयत खराब थी। मेघवाल राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज दलित नेताओं में शामिल थे। वे पिछले करीब 41 साल से राजनीति में सक्रिय थे। सुजानगढ़ विधानसभा सीट से निर्दलीय समेत कांग्रेस की टिकट पर वह 5 बार (1980, 90, 98, 2008 और 2018) विधायक चुने गए।

मास्टर भंवरलाल के अंतिम दर्शन के लिए छतों पर चढ़े लोग। - Dainik Bhaskar

मास्टर भंवरलाल के अंतिम दर्शन के लिए छतों पर चढ़े लोग।

13 मई की रात को बिगड़ी थी भंवरलाल की तबियत
जयपुर में 13 मई की रात को मास्टर भंवरलाल मेघवाल अपने आवास पर थे। इस दौरान वे चक्कर खाकर गिर पड़े। उनकी बेटी व अन्य परिजन उन्हें साकेत अस्पताल ले गए। वहां चेकअप के बाद भंवरलाल को एसएमएस अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया। तब बताया गया था कि ब्रेन हेमरेज होने से शरीर के दाहिने हिस्से में पैरालिसिस अटैक हुआ था। कुछ दिनों बाद एयर एंबुलेंस से मेघवाल को मेदांता अस्पताल भेजा गया था।

परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी; एक बेटी का 29 अक्टूबर को हुआ निधन

सुजानगढ़ के शोभासर ग्राम पंचायत के गांव बाघसर पूर्वी में चुनाराम मेघवाल के यहां 2 जुलाई 1948 को मास्टर भंवरलाल मेघवाल का जन्म हुआ। वर्तमान में परिवार सुजानगढ़ उपखंड मुख्यालय के पीछे स्थित जयनिवास में रहता है। भंवरलाल मेघवाल की शादी 15 मई 1965 को केसर देवी से हुई। इनके एक बेटा व दो बेटी हैं। एक बेटी बनारसी देवी भी राजनीति में सक्रिय थीं। चूरू की जिला प्रमुख भी रही थीं। उनका 29 अक्टूबर को निधन हो गया था। जबकि भंवरलाल के इकलौते बेटे मनोज व्यवसाय करते हैं।

परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने पार्थिव देह को अंतिम नमन किया। - Dainik Bhaskar

परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने पार्थिव देह को अंतिम नमन किया।

सरकारी स्कूल में पीटीआई थे, मास्टर की नौकरी छोड़कर पहला चुनाव लड़ा
भंवरलाल मेघवाल पहले सरकारी टीचर हुआ करते थे। सुजानगढ़ के राजकीय झंवर स्कूल में बतौर शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) नौकरी की शुरुआत की। काफी सालों तक टीचर रहे। इसीलिए इनकी पहचान मास्टर भंवरलाल के नाम से भी थी। वर्ष 1977 में शिक्षक की नौकरी से इस्तीफा देकर भंवरलाल मेघवाल ने इसी साल विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाया। पहली बार में वे हार गए।

फिर 1980 के चुनाव में बतौर निर्दलीय जीत दर्ज की। उसके बाद से हर बार राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। आपको बता दें कि मास्टर भंवरलाल मेघवाल के साथ राजनीति में एक अजब संयोग जुड़ा हुआ था। वो यह है कि वे एक विधानसभा चुनाव हारते थे और इसके बाद अगला जीतते थे।

भंवरलाल के अंतिम दर्शन के लिए कांगेस के साथ ही भाजपा के भी कई नेता पहुंचे। - Dainik Bhaskar

भंवरलाल के अंतिम दर्शन के लिए कांगेस के साथ ही भाजपा के भी कई नेता पहुंचे।

बयानों के कारण चर्चित रहे मेघवाल, पिछली गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा
भंवरलाल मेघवाल ने 10 बार चुनाव लड़ा। इनमें वे पांच चुनाव जीते और पांच चुनाव हार गए। पिछली बार अशोक गहलोत की सरकार में कर्मचारियों व तबादलों पर राजनीतिक बयानों की वजह से चर्चित रहे भंवरलाल मेघवाल शिक्षा मंत्री पद का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।

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