Prashant Bhushan contempt case 122 law students appeal SC to reconsider judgment | देशभर के 122 लॉ स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट को लिखा इमोशनल लेटर; कहा- कोर्ट फैसले पर फिर से विचार करे

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नई दिल्ली7 दिन पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने महीने की शुरुआत में ही भूषण को उनके ट्वीट्स पर कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया था और फैसला सुरक्षित रख लिया था। (फाइल फोटो)

  • अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनाएगा फैसला
  • भूषण को नवंबर 2009 में भी सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस दिया था

देशभर के 122 लॉ स्टूडेंट्स ने सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट की अवमानना के मामले में एक इमोशनल लेटर लिखा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) एसए बोबडे और अन्य जजों को लिखे खत में कहा गया है कि कोर्ट मामले में अपने फैसले पर फिर से विचार करे।

सुप्रीम कोर्ट ने महीने की शुरुआत में ही भूषण को उनके ट्वीट्स पर कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया था और फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अपना फैसला सुनाएगा।

लोगों में भरोसा बहाल करके आलोचना का जवाब दे कोर्ट
खत में कहा गया कि न्यायापालिका को लोगों में भरोसा बहाल करके आलोचना का जवाब देना चाहिए। जब आलोचना पीड़ा से उठे और न्याय की मांग करे, तो न्यायपालिका को अवमानना का आरोप नहीं लगाना चाहिए। वो भी ऐसे व्यक्ति पर, जो उसी गहराई से न्याय मांग रहा हो, जो वह दूसरों के लिए मांगता रहा है।

लॉ स्टूडेंट्स ने कहा कि उन्होंने लंबे समय से प्रशांत भूषण को भ्रष्टाचार के खिलाफ और पारदर्शिता, जवाबदेही, पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकारों के लिए कोर्ट में लड़ते देखा है। कानून के क्षेत्र और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान बेशक सराहनीय है।

‘दरकिनार किए गए लोगों के लिए था ट्वीट’
वकीलों ने कहा कि जिन दो ट्वीट के आधार पर भूषण को कंटेम्प्ट का दोषी ठहराया गया है, वो ट्वीट उस उस बेआवाज तबके का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जिन्हें दरकिनार कर दिया गया है। ये ट्वीट कोर्ट की पवित्रता को चोट नहीं पहुंचाते।

प्रशांत भूषण के इन 2 ट्वीट को अवमानना माना

  • पहला ट्वीट: 27 जून- जब इतिहासकार भारत के बीते 6 सालों को देखते हैं तो पाते हैं कि कैसे बिना इमरजेंसी के देश में लोकतंत्र खत्म किया गया। इसमें वे (इतिहासकार) सुप्रीम कोर्ट खासकर 4 पूर्व सीजेआई की भूमिका पर सवाल उठाएंगे।
  • दूसरा ट्वीट: 29 जून- इसमें वरिष्ठ वकील ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे की हार्ले डेविडसन बाइक के साथ फोटो शेयर की। सीजेआई बोबडे की आलोचना करते हुए लिखा कि उन्होंने कोरोना दौर में अदालतों को बंद रखने का आदेश दिया था।

भूषण को पहले भी अवमानना का नोटिस दिया गया था
प्रशांत भूषण को नवंबर 2009 में भी सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का नोटिस दिया था। तब उन्होंने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों पर टिप्पणी की थी।

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